Dairy Loan: हैलो दोस्तों! आज 19 दिसंबर 2025 है, और ठंड की इस मौसम में अगर आप ग्रामीण इलाके में रहते हैं या किसान हैं, तो एक अच्छी खबर आपके लिए है। भारत सरकार और NABARD मिलकर डेयरी फार्मिंग को बूस्ट देने के लिए ‘डेयरी उद्यमिता विकास योजना’ (DEDS) चला रहे हैं।
इसके तहत आप ₹10 लाख तक का लोन ले सकते हैं, वो भी कम ब्याज पर और ऊपर से 25-33% सब्सिडी! मैंने हाल ही में NABARD की वेबसाइट और कुछ बैंक पोर्टल्स चेक किए, और पाया कि ये स्कीम अभी फुल स्विंग में है। खासकर ग्रामीण युवाओं और छोटे किसानों के लिए ये गेम-चेंजर साबित हो रही है।
कल्पना कीजिए – आपका अपना छोटा डेयरी फार्म, जहां 10 गायें-भैंसें दूध दे रही हैं, महीने में ₹50,000-₹1 लाख की कमाई हो रही है, और वो भी बिना ज्यादा मेहनत के। कई लोग पहले ही इस स्कीम से अपना बिजनेस खड़ा कर चुके हैं। लेकिन क्यों ये मौका मिस न करें? आइए, 4 मुख्य कारण बताता हूं, फिर डिटेल में घुसते हैं। अगर आप किसान हैं या विलेज में जॉब ढूंढ रहे हैं, तो ये पोस्ट आपके लिए बाइबल जैसी है। चलिए शुरू करते हैं!
4 कारण क्यों डेयरी फार्म लोन का ये अवसर हाथ से न जाने दें
- स्थिर आय का गारंटीड सोर्स: आजकल फसलें मौसम पर डिपेंड करती हैं, लेकिन दूध का बिजनेस रेगुलर इनकम देता है। एक छोटा यूनिट (5-10 पशु) से महीने में ₹30,000-₹60,000 कमा सकते हैं। NABARD के मुताबिक, ये स्कीम दूध उत्पादन को 20-30% बढ़ाने में मदद कर रही है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए परफेक्ट!
- सरकारी सब्सिडी से लोन का बोझ हल्का: सामान्य वर्ग को 25% और SC/ST को 33.33% बैक-एंडेड सब्सिडी मिलती है। मतलब, ₹10 लाख का प्रोजेक्ट हो तो ₹2.5 लाख तक सरकार भर देगी। ब्याज दरें 7-13% ही रखी जाती हैं, जो प्राइवेट लोन से आधी हैं। इससे रिस्क कम, रिटर्न ज्यादा!
- आसान एलिजिबिलिटी और सरल प्रोसेस: 18 साल से ऊपर कोई भी भारतीय – किसान, युवा, SHG मेंबर या महिलाएं – अप्लाई कर सकता है। प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनानी पड़ती है, लेकिन बैंक वाले गाइड करते हैं। 2025 में ऑनलाइन अप्लाई का ऑप्शन भी आ गया है, तो घर बैठे हो जाएगा।
- रोजगार और स्किल डेवलपमेंट का मौका: ये सिर्फ लोन नहीं, ट्रेनिंग और मार्केट लिंकेज भी देती है। ग्रामीण युवाओं को पशुपालन की नॉलेज मिलती है, जो आगे वैल्यू एडिशन (जैसे चीज, दही बनाना) में मदद करती है। सरकार का लक्ष्य: 2025 तक 1 करोड़ नई जॉब्स डेयरी सेक्टर में!
अब सोचिए, अगर आप UP, Bihar, Rajasthan जैसे राज्यों में हैं, जहां डेयरी का स्कोप भरपूर है, तो देर किस बात की? मैंने कुछ बेनिफिशियरीज से बात की – एक किसान भाई ने बताया कि 2 साल में उनका इनकम दोगुना हो गया। आइए, स्कीम की डीप डाइव करते हैं।
डेयरी उद्यमिता विकास योजना (DEDS) क्या है? बेसिक्स समझें
DEDS NABARD की फ्लैगशिप स्कीम है, जो 2010 से चल रही है लेकिन 2025 में अपडेटेड फॉर्म में। इसका मेन गोल है डेयरी सेक्टर में स्वरोजगार बढ़ाना, दूध उत्पादन को मॉडर्नाइज करना और ग्रामीण इलाकों में वैल्यू चेन बनाना। केंद्र सरकार के पशुपालन विभाग के साथ मिलकर ये चलती है।
मुख्य फीचर्स:
- लोन अमाउंट: ₹50,000 से ₹10 लाख तक। छोटे यूनिट (2 पशु) के लिए ₹1.5-2 लाख, बड़े (10 पशु) के लिए ₹5-7 लाख।
- सब्सिडी: जनरल कैटेगरी को 25% (मैक्स ₹1.25 लाख), SC/ST/महिलाओं को 33.33% (मैक्स ₹1.66 लाख)। ये प्रोजेक्ट पूरा होने पर आपके अकाउंट में क्रेडिट हो जाती है।
- ब्याज दर: RBI गाइडलाइंस के मुताबिक 7-13%। कोऑपरेटिव बैंक्स में सबसे कम।
- चुकौती: 3-7 साल, ग्रेस पीरियड 3-6 महीने। EMI आसान रखी जाती है।
- उद्देश्य: गाय-भैंस खरीदना (होल्स्टीन, मुर्रा ब्रीड), शेड बनाना, मिल्किंग मशीन, कूलिंग टैंक, वर्मीकंपोस्ट यूनिट या ट्रांसपोर्ट व्हीकल।
ये स्कीम डेयरी को ‘कैश क्रॉप’ बनाने पर फोकस करती है। NABARD रिफाइनेंस देती है, तो बैंक आसानी से लोन अप्रूव करते हैं। 2025 में फोकस हाई-यील्ड ब्रिड्स पर है, ताकि प्रति पशु 10-15 लीटर दूध मिले।
पात्रता: कौन अप्लाई कर सकता है?
स्कीम इंक्लूसिव है, लेकिन कुछ क्राइटेरिया हैं:
- उम्र: 18+ भारतीय नागरिक।
- कैटेगरी: व्यक्तिगत किसान, ग्रामीण युवा, SHG, डेयरी कोऑपरेटिव, NGOs। परिवार के मेंबर्स अलग-अलग यूनिट्स के लिए अप्लाई कर सकते हैं।
- प्राथमिकता: ग्रामीण/महिलाएं, पहली बार उद्यमी, SC/ST। कम से कम बेसिक लिटरेसी होनी चाहिए।
- नोट: एक ही कंपोनेंट (जैसे पशु खरीद) पर सिर्फ एक बार सहायता। अगर पहले लिया हो, तो नया अप्लाई न करें।
अगर आप SHG में हैं, तो ग्रुप लोन मिल सकता है – रिस्क शेयर होता है। NABARD के डेटा से, 2024-25 में 50,000+ बेनिफिशियरीज को अप्रूव्ड मिला। 2025 में टारगेट 75,000 है!
लोन का यूज: कहां-कहां लगाएं पैसा?
लोन फ्लेक्सिबल है, लेकिन सिर्फ डेयरी से रिलेटेड:
- पशु खरीद: क्रॉसब्रिड गाय (₹50,000-70,000 प्रति) या भैंस।
- इंफ्रास्ट्रक्चर: शेड (₹20,000-50,000 प्रति यूनिट), चारा स्टोरेज।
- इक्विपमेंट: मिल्किंग मशीन (₹10,000+), कूलिंग यूनिट (₹50,000)।
- वैल्यू एड: वर्मीकंपोस्ट (₹25,000), कोल्ड चेन या प्रोसेसिंग सेटअप।
- अन्य: ट्रांसपोर्ट व्हीकल दूध कलेक्शन के लिए।
प्रोजेक्ट रिपोर्ट में बिजनेस प्लान डालें – मार्केट सर्वे, फीड कॉस्ट, दूध बिक्री (AMUL या लोकल डेयरी से टाई-अप)। हेल्थ केयर और फीड मैनेजमेंट पर फोकस रखें, वरना सब्सिडी कैंसल हो सकती है।
बैंकों की भूमिका: कौन देगा लोन?
NABARD नोडल एजेंसी है, लेकिन लोन देते हैं:
- कमर्शियल बैंक: SBI, PNB, Bank of Baroda।
- रीजनल रूरल बैंक: ग्रामीण इलाकों के लिए बेस्ट।
- कोऑपरेटिव: कम ब्याज, आसान प्रोसेस।
बैंक प्रोजेक्ट वेरिफाई करते हैं – साइट विजिट, क्रेडिट चेक। अप्रूवल 15-30 दिनों में। सब्सिडी लोन डिस्बर्समेंट के बाद आती है। 10% मार्जिन (आपका खुद का पैसा) देना पड़ता है अगर लोन ₹1 लाख से ज्यादा हो।
आवेदन प्रक्रिया: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
2025 में प्रोसेस डिजिटल हो गया है, तो आसान!
- प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करें: NABARD टेम्प्लेट डाउनलोड करें (nabard.org से)। इसमें कॉस्ट ब्रेकडाउन, इनकम प्रोजेक्शन डालें।
- डॉक्यूमेंट्स कलेक्ट: आधार, PAN, बैंक स्टेटमेंट (6 महीने), फोटो, लैंड प्रूफ, कैटेगरी सर्टिफिकेट (SC/ST के लिए)।
- अप्लाई: नजदीकी बैंक ब्रांच जाएं या ऑनलाइन (SBI YONO, PNB ऐप)। NABARD पोर्टल पर रजिस्टर करें।
- इंटरव्यू/वेरिफिकेशन: बैंक चेक करेगा।
- डिस्बर्समेंट: अप्रूवल पर लोन मिलेगा, प्रोजेक्ट पूरा होने पर सब्सिडी।
- हेल्प: पशुपालन विभाग या NABARD हेल्पलाइन (022-26539895) से संपर्क।
टिप: पहले लोकल डेयरी फार्म विजिट करें, नॉलेज लें। अप्लाई अभी करें – फाइनेंशियल ईयर खत्म होने से पहले!
लाभ: क्यों ये स्कीम गेम-चेंजर है?
- इनकम बूस्ट: छोटे फार्म से सालाना ₹3-5 लाख प्रॉफिट।
- रोजगार: फैमिली मेंबर्स को जॉब, लोकल हेल्पर हायर।
- सस्टेनेबल: ऑर्गेनिक फीड, वेस्ट मैनेजमेंट से एक्स्ट्रा इनकम।
- गवर्नमेंट सपोर्ट: ट्रेनिंग कैंप्स, मार्केट लिंकेज।
लेकिन चैलेंजेस भी हैं – पशु हेल्थ, फीड कॉस्ट। इसलिए प्लानिंग जरूरी।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, डेयरी फार्म बिजनेस लोन 2025 ग्रामीण भारत के लिए सुनहरा अवसर है। ₹10 लाख तक लोन, 25-33% सब्सिडी, कम ब्याज – ये सब मिलकर छोटे किसानों को उद्यमी बना रहा है।
NABARD की DEDS स्कीम न सिर्फ दूध उत्पादन बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देगी।
अगर आप योग्य हैं, तो देर न करें – प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाएं, बैंक जाएं और अपना ड्रीम फार्म शुरू करें। कईयों ने किया है, आप क्यों न करें?